Monthly Archives: June 2014

वतन के वास्ते …

हंसने हंसाने का काम बहुत हुआ , अब रहा नहीं कोई बाकिपीने पिलाने का भी खूब चला, हमसा न मिलेगा कोई साकीअब तो कर जाओ कुछ काम ऐसा , अपने… Read more »

अपने ही बगावत करते हैं

कुछ लोग बिना बताये , कुछ बताकर शरारत करते हैंकुछ मज़बूरी से, कुछ दरियादिली से हिमायत करते हैंऔर नहीं निभाते, ये रिश्ते भी दिली मौहब्बत से लोगलोगो की छोडो ,… Read more »

माँ…

माँ देवी है, दौलत हैं, प्रेम के रिश्तो की मूरत हैन करती निवास मंदिर में, भगवान सी सूरत हैन रोटी, न कपडा ,नहीं चाहिए मुझे मकानबस जान लो इतना मुझे… Read more »

मैं मान रहा मैं मान रहा…

मैं मान रहा मैं मान रहा इन वीरो ने ही आजादी दिलवाई हैये सैनिक नहीं, भारत के आत्मविश्वास की लड़ाई हैपरसों लड़े थे काकोरी में, कल लड़े थे सीमा परआज… Read more »

साईं हूँ

कभी मुझे ऊँचा दीखता आसमान कहा गयाकभी मुझे मंदिर में बैठा भगवान कहा गयासबका मालिक एक है , मैं बस साईं हूँ सिरडी काफिर नजाने क्यों मुझे खुदा का अपमान… Read more »

शब्द…

आसमाँ को देखकर , ऊँचा उठने को मन करता हैदेखकर इन्द्रधनुष , खुद को रंगने का मन करता हैजब देखता हूँ मैं , उन काले अक्षरों को तख्ती परसारे जग… Read more »