Monthly Archives: April 2017

मामूली नहीं स्थिति

मामूली नहीं स्थिति देश की…. गंभीर हैं घाटी से निकल रहे…….. नुकीले तीर हैं वीरो की शहादत का…….ये अपमान है लड़ाई का नहीं शायद युद्ध का ऐलान है हाँ दिल्ली… Read more »

नई शुरुआत कर लेते हैं

उनकी तरफ से हमारे लफ्जो में.. आखिरी शे’र खास आपकी खतिर भूल जाते हैं सब, फिर से नई शुरुआत कर लेते हैं छोड़ो वो पुराने किस्से , कोई और बात… Read more »

वजूद कहाँ

कम्बख्त मेरे अल्फाजो का वो वजूद कहाँ जो कोई जवाब तेरी निगाहों का दे सकें.. #गुनी…

 हिंदुस्तान बचा लीजिये

एक बार फिर… बनकर भगवान, आप हिन्द का मान सम्मान बचा लीजिये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आप भारत का अभिमान बचा लीजिये किसी और से नहीं ,  मेरे देश के युवाओं… Read more »

ढूंढ लेता हूँ

बेगाने शहर में मैं अपना घर ढूंढ लेता हूँ मिट्टी सा हूँ मैं, मिट्टी में हुनर ढूंढ लेता हूँ कईं लोग ढूंढते हैं, इधर उधर , यहाँ वहां मैं किस्मत… Read more »

है कईं

किताबो में हुनर है कईं कवि , तो शायर है कईं #गुनी…

ठीक नहीं है

किसी को रात भर जगाना, ठीक नहीं है अपनी ही रूह को सताना, ठीक नहीं है हमारा दिल हमारे पास, तुम्हारा तुम्हारे फिजूल इल्जाम लगाना ,  ठीक नहीं है आना… Read more »

इबादत में ले लो

मियां, एक दफा मेरा नाम इबादत में ले लो फिर इस दिल को अपनी हिरासत में ले लो बस एक बार बोल दो तुम मुझे मौहब्बत से फिर सारी जिंदगी… Read more »

किनारा कर लिया

कुछ शे’र आपकी खिदमत में…?? बड़े सवाल करता है कम्बख्त दिल मेरा तौबा कर यादो ने भी किनारा कर लिया शायद, जान लेने की साजिश है उसकी उसने घर ,… Read more »