Monthly Archives: October 2015

हुक्म इन जल्लादो का

देश मेरा, देश की जमीं मेरी और हुक्म इन जल्लादो कादेखकर शर्मशार हैं भारती , कृत शैतान की औलादो का #गुनी…

एक भी न हो सरहद

भारतीय हूँ, वैसे तो मुझे भी हिन्दुस्तान चाहिएसब धर्मो को एक करने वाला रामबाण चाहिएसिर्फ सरहदों से होती हों  ,  सारी लड़ाइयां तोजहां एक भी न हो सरहद ऐसा जहान… Read more »

कैसा रास्ता बताऊँ मैं

हद हो गई लोगो की बातो से मुकरने कीतोड़ने, टूटने और फिर खुद बिखरने कीआखिर उन्हें क्या, कैसा रास्ता बताऊँ मैं जिन्हें आदत न हो, संभलकर चलने की #गुनी…

लड़ाई चाहिए

मियां किसे चिरागों की सफाई चाहिएगगन को छू सकूँ, ऐसी ऊंचाई चाहिएमाँ को फक्र हो  , मेरी काबिलयत परमेरे दोस्त मुझे सिर्फ वो लड़ाई चाहिए #गुनी…

कलम से पहचान होती है

पंखो से नहीं , बुलंद हौसलो से उड़ान होती हैयुवा पीढ़ी उम्र से नहीं इरादों से जवान होती हैबेसक तलवारे कितनी भी बड़ी बड़ी रख लोकलमकार की सिर्फ कलम से… Read more »