Category: कविता

भारत में अभिव्यक्ति की आजादी है

थोड़ी देरी से पुराने ख्यालो का कच्चा कच्चा रूप… भारत माता की जय को अब हथियार बनाकर बोलेंगेलेकर के हाथो में तिरंगा हिन्द की गली गली में डोलेंगे माँ की… Read more »

हिन्द में रहने का अधिकार नहीं

जिनके नारो को भारत की बर्बादी ही भाती होजिन्हें अपनी माँ को गाली तक देनी आती होआग लगा दो उनको जिन्हें बुरा तिरंगा लगता होदफनादो जिंदा जो इनके जैसा भिखमंगा… Read more »

राजा राम की पावन भूमि

एक नादान कोशिश… राजा राम की पावन भूमी, इसको मैला कर डाला हैदूध पिला कर सांपो को ,  और विषैला कर डाला हैबस दिल्ली सबको याद रहा और देश को… Read more »

लोकतंत्र का हूँ सैनिक

लोकतंत्र का हूँ सैनिक , सत्ता पर तीखे वार लिखूंगायुवा हूँ, मैं युवाओ की खातिर नया हथियार लिखूंगा उल्टा सीधा जो भी हो आज जला कर राख करूँगागद्दी पर बैठे… Read more »

बीबी मेरी…

बीबी मेरी बेलन लेके पीछे मेरे भागती हैभूखी शेरनी सी मुझे वो ताकती हैसोचती है झटके में एक खा जायेगीमारकर मुझको अखबारो में छा जायेगीमुझे लगता था सिर्फ मेरी ही… Read more »

सेना का सिपाही हूँ

कभी अपने घर की खिड़की खोलकर देखा हैमुझपर ऊँगली उठाते हो कभी नेता जी को बोलकर देखा हैये मत सोचना मैं बाज़ार में खड़ा ठेले वाला हूँ गुड्डे गुडिया की… Read more »